कैसे जाऊं रे हाँ-हाँ नंद जू के द्वार… – Shri Krishna Janam Badhai

Kaise Jau Re Haa-Haa Nand Ju Ke Dwar…

कैसे जाऊं रे हाँ-हाँ नंद जू के द्वार, सोच रहे वसुदेव जी ।

हाथ हथकड़ी पांयन बेड़ी, लग रहे वज्र किवार

बादर गरजै पानी बरसै, भयो घोर अंधियार

डरप रहे वसुदेव जी ।

या पार मथुरा वा पार गोकुल, बीच यमुन की धार

चढ़ रही नदिया भंवर पड़ रहे सूझै नहीं किनार

देख रहे वसुदेव जी ।

खुली हथकड़ी खुल गई बेड़ी, खुल गए वज्र किवार

शेष नाग ने छत्र करयो है, चमकै नव लख तार

जाय रहे वसुदेव जी ।

मथुरा सोयो गोकुल सोयो, सोई सृष्टी सारी

लीलाधर लाली लै आये, योग माया औतारी

आय गये वसुदेव जी ।

लग गये तारे लग गई बेड़ी रोई कन्या भारी

आयो कंस पटक पछारी अष्टभुजा भई नारी

कर जोरें वसुदेव जी ।

बोली देवी नभ में ठाड़ी, ओ रे अधम कसाई

तेरौ काल कहूँ है प्रग्ट्यो, काहे शिशु मरवाई

सिर नावें वसुदेव जी ।

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