श्री राधा जी की आरती ।। Shree Radha Ji Aarti ।।

जै जै हो राधे जू मैं शरण तिहारी ।

लोचन आरती जाऊँ बलिहारी ।। जै जै हो०

पाट पाटम्बर ओढ़े नीली सारी ।

सीस के सैंदुर जाऊँ बलिहारी ।। जै जै हो०

रतन सिंहासन बैठी श्री राधे ।

आरती करें हम पिय संग जोरी ।। जै जै हो०

फूल सिंहासन बैठीं श्री राधे ।

आरती करें हम पिय संग जोरी ।। जै जै हो०

झलमल झलमल मानिक मोती ।

अब लखि मुनि मोहे पिय संग जोरी ।। जै जै हो०

श्री राधे पद पंकज भक्त की आशा ।

दास मनोहर करत भरोसा ।। जै जै हो०

राधा मेरी स्वामिनी मैं राधे की दास ।

जनम-जनम मोहिं दीजियो श्रीवृन्दावन वास ।।

सब द्वारन कूँ छोड़ि के आयो तेरे द्वार ।

श्रीवृषभानु की लाड़िली मेरी ओर निहार ।।

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