सेवा कुञ्ज में मंगला भोग के पद ।। Mangla Bhog Pad ।।

 

 

।। राग गीत ।।

माखन खा गया बिहारी मेरा हँस-हँस के ।

माखन खा गई राधा प्यारी मेरा हँस-हँस के ।

मेरे कोठे पै आ वैहदा, माखन लुट-लुट खांदा ।

मेरी मटकी फोड़ गिरांदा, जाँदा कोठे टपटप के ।।

मैं तो दै रहियाँ दुहाई, पकड़ो-पकड़ो रे कन्हाई ।

कित्थे भाग न जाई, जाँदा नस-नस के ।।

तैन्नू कुब्जा पढ़ाई पट्टी, उत्थे छाछ न मिलदी खट्टी ।

माखन रोटी देवां तत्ती, खाओ हँस-हँस के ।।

जरा मुरली मधुर बजाओ, मैन्नू मीठी तान सुनाओ ।

थारे चरण कमल बलिहारी, दरशन दीजो हँस-हँस के ।।

 

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