झूला झूलें राधा प्यारी, चुनरिया फहर-फहर फहरै – Savan Jhoola

Jhoola Jhule Radha Pyari Chunariya Fahar Fahar Fahre

झूला झूलें राधा प्यारी, चुनरिया फहर-फहर फहरै ।।

सावन की हरियाली छाई

कारी घटा बड़ी घिर आई

ऋतु झूलन की है मन भाई

जमुना तीर बहै पुरवैया सरर-सरर सररै ।

झूला परयो कदम की डरियाँ

झीनी पर रहीं नहनी बुँदिया

झोटा देय रही सब सखियाँ

मुख पै लटक रही लट कारी लहर-लहर लहरै ।

उरझ परी वैजंती माला

सुरझावत हैं श्री नन्दलाला

खैंच लियो तब भोरी बाला

टूट परी मोतिन की माला छहर-छहर छ्हरै ।

ररकें मोती झूला पर ते

सखियाँ बीन रहीं नीचे ते

टपकें खिले फूल ऊपर ते

फूलन गहना हार झरें हैं झहर-झहर झहरें ।

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