मुरलिया मधुर बजाई झूलत में गोपाल – Savan Jhoola

Muraliya Madhur Bajai Jhulat Mei Gopal

मुरलिया मधुर बजाई झूलत में गोपाल ।।

झूला झूल रहे गिरिधारी

संग बैठी कीरति सुकुमारी

मुरली सुनत मगन भई भारी

रीझ कें कण्ठ लगाई, नवल किशोरी बाल ।

गावन लगीं मल्हार कुमारी

कोयल मौन भई मतवारी

मोर पपैया हू बलिहारी

रसीली तान सुनाई, हाथन सौं दै ताल ।

सोई तान भरें मुरली में

जो-जो प्यारी गावें स्वर में

लाग डाट के या गायन में

प्रेम की बरसा छाई, भीजै राधा लाल ।

राग मालिका गाय दिखावें

ताल मालिका भेद बतावें

लय माला सुन्दर दरसावें

अद्भुत भाव दिखाई, धारें स्वर के माल ।

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