झूला झूलें यमुना के किनरिया, राधा संग साँवरिया – Savan Jhoola

Jhoola Jhule Yamuna Ke Kinariya, Radha Sang Sanwariya

झूला झूलें यमुना के किनरिया, राधा संग साँवरिया ।।

झूला कदम की डारन डारयो

झूला फूलन तेई संवारयो

ठंडी बह रही ब्यार पुरवैया, राधा संग… ।

चोटी श्यामा जू की लहरै

पटुका गिरिधारी को फहरै

राधा रानी को उड़ती चुनरिया, राधा संग… ।

मोरा पंखन खोल पसारे

झूमें नाचें हैं मतवारे

पीऊ-पीऊ बोलै प्यारो रे पपैया, राधा संग… ।

कारे कारे बादर आये

उमड़ घुमड़ कर ऊपर छाये

कैसी चमक रही है बिजुरिया, राधा संग… ।

फूल रही है कदमन डारी

सुगन्ध फूलन की है भारी

झीनी-झीनी पड़ रही फुहरिया, राधा संग… ।

बेला जुही मोंगरा फूले

फूल फूल पै भंवरा झूले

प्यारी लागै नन्ही-नन्ही बूंदरिया, राधा संग… ।

बादर धीरे धीरे गरजें

ताल मृदंग बजै मन लरजै

मीठी बाजै मोहन की बांसुरिया, राधा संग… ।

झूला ऊपर नीचे जावै

आंचर प्यारी को उड़ जावै

लग रही नटवर की ये नजरिया, राधा संग… ।

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