कैसे झूम रहे अम्बर में प्यारे बादर मतवारे – Savan Jhoola

Kaise Jhoom Rahe Ambar Mei Pyare Badar Matvare

कैसे झूम रहे अम्बर में प्यारे बादर मतवारे ।।

टोल टोल हाथी से आये

लटक लटक धरती लौं छाये

चारों ओर घूम रहे धाये

धौरे पीरे धूम धुमारे कजरारे कारे ।

गरजन लगे एक संग मिल कें

बरसन लगे बड़ी बूंदन ते

धूँआंधार भयो मेहन ते

ताल तलैया नदी सरोवर भर गये जल भारे ।

आय फंसी या लता पतन में

सखी सहेली कोऊ न संग में

इकली रह गई गहवर वन में

लेहु उढ़ाय कमरिया अपनी हा-हा खाऊँ रे।

सुनतइ आये श्री गिरिधारी

खोइ में लीनी ब्रज नारी

कोयल बोल रहीं धुनि प्यारी

कैसी हरियाली छाई, चल तोय दिखाऊँ रे ।

चले संग लै भीतर कुंजन

गोरी भीज रही है लाजन

अंगिया चूनर पकरे हाथन

सुन इक बात रसीली, प्यारी तोय सुनाऊँ रे ।।

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