बादर गरजें बिजुरी चमकै पानी बरसै गोलाढार – Savan Jhoola

Badar Garje Bijuri Chamke Pani Barse Goladhar

बादर गरजें बिजुरी चमकै पानी बरसै गोलाढार ।

बादर चढ़ रहे घूम-घुमारे

धौरे पीरे कारे कारे

कोई कोई धूम धुमारे

मानों फौज चढ़ी राजा की करदे पटिया पार ।

तैसी ब्यार चलै पुरवैया

देय झकोरे है सुखदैया

मोरा लेय रहे फिरकैया

बूंदन की वे लगें पछाटें अर्राटे की मार ।

ऐसे में इक बनी अटारी

जा पै बैठे प्रीतम प्यारी

श्री राधा और श्री बनवारी

हरियाली की छटा देख रहे सावन पै बलिहार ।

देखें गहवर की हरियारी

सुनें कूक कोयल की प्यारी

पी पी करै पपैया भारी

सुन रीझें रस भीजें देवें गरबैयन के हार ।

चले संग लै भीतर कुंजन

गोरी भीज रही है लाजन

अंगिया चूनर पकरे हाथन

सुन इक बात रसीली, प्यारी तोय सुनाऊँ रे ।

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