मृत्युंजय महामंत्र ।। Mrityunjay Mahamantra ।।

ॐ हो जूंस: ॐ भूर्भव: स्व:

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धि पुष्टि वर्धनम । उर्वारुकमिव बन्धनात मृत्योर्मुक्षीय ममृतात ।।

ॐ स्व: भुव: भू: स: जूं हौ ॐ ।

भावार्थ : तीनों लोकों के पालनकर्ता, व्याधिहर्ता, पोषणहार परमात्मा, पक्का फल जिस तरह उसके डंठल से अलग हो जाता है उसी प्रकार रोग और मृत्यु से मुझे बचाना और अमृतमय जीवन प्रदान करना ।

…………..