रसीलो सावन आयो, झूलें कदम की छाँह – Savan Jhoola

Rasilo Savan Aayo Jhule Kadam Ki Chhah

रसीलो सावन आयो, झूलें कदम की छाँह ।।

विनती सुनिये राधा प्यारी

हरियाली में फूली क्यारी

मुसक्याई सुन भानुदुलारी

कहयौ यह मन कौ भायो डार चली गरबांह ।

चले जात दोउ धीरे धीरे

श्री यमुना के तीरे तीरे

छलक रह्यो जल नीरे नीरे

पपैया बोल सुनायो, कुञ्ज गली की राह ।

फूल्यो कदम फूल अति भारौ

झूला फूलन तेइ संवारौ

अनौखो रस बरसायो, लता-पतन की छांह ।

गीत गवावें ब्रज की बाला

चिरजीवो राधा नन्दलाला

झोटा में सखी दै रहीं ताला

घोर गीतन कौ छायौ, वृन्दावन के मांह ।

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