दधि लूट लियौ दगरे में, कुंजन… – Dadhi Madhuri

 

Dadhi Loot Liyo Dagre Mei, Kunjan Te Tanak Pare Mei

दधि लूट लियौ दगरे में, कुंजन ते तनक परे में ।।

आय रही दधि बेच वृन्दावन साँझ भई दिन ढुर रह्यो रे,

जमुना नीर तीर बन मारग मेरे मन रस घुर रह्यो रे,

इकली देख मोय बीच बनी के झपट लियो गहरे में ।

छोड़दे कान्हा बेर भये घर सास देय मोय गारी रे,

तानों दै दै जायगी ननदिया रार करैगी भारी रे,

सबरी सखी चबाब करेंगी हंसी होय सगरे में ।

अरी गूजरी बहुत दिना ते तू मेरे मन बस रही री,

वा दिन बच गई बात बनायके चाल बहुत तू जानें री,

वा दिन लूट्यो मो मन हँसके नखरेई नखरे में ।

कंचन मोल दही है मेरो कहा ग्वारिया खावैगो,

कंचन मटकी ऐडई कंचन कैसे कोई लेवैगो,

सेंत मेंत मे कंचन चाहूँ दान लऊँ सब मेरो है,

ब्रज में मैं ब्रजराज कहाऊँ कहा नाय तू जाने है,

बीच डगर में ग्वालिन लुट गई संकरेई संकरे में ।।

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